बस्तर की बदली तस्वीर! जहां वोटिंग थी खौफ, अब वहीं बढ़ रहा लोकतंत्र; पूवर्ती में 400 नए वोट

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Last Updated:June 22, 2026, 14:07 IST

Bastar News: बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब हालात बदल रहे हैं. जहां कभी लोग वोट देने से डरते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में ग्रामीण वोटर आईडी बनवा रहे हैं. सड़क, स्कूल, बैंक और बस सेवाओं जैसी सुविधाएं बढ़ रही हैं. आइए जान लेते हैं क्या-क्या बदलाव हो रहे हैं.

बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का डर इतना था कि लोग वोट देने से भी घबराते थे, वहां अब हालात तेजी से बदल रहे हैं. एक समय ऐसा था जब वोट करने के बाद महिलाएं अपनी उंगली पर लगी स्याही मिटाने की कोशिश करती थीं, क्योंकि उन्हें डर था कि नक्सली वोट डालने पर सजा दे सकते हैं, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है. जी हां, सबसे बड़े नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती में इन दिनों वोटर आईडी बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. इनमें महिलाओं की संख्या भी काफी ज्यादा है. गांव के स्कूल शिक्षक लोगों का नाम दर्ज कर रहे हैं और उनकी तस्वीरें ली जा रही हैं. जल्द ही करीब 400 नए वोटर गांव की वोटर लिस्ट में जुड़ जाएंगे.

नक्सलवाद खत्म के बाद कई बदलाव
31 मार्च को क्षेत्र में सशस्त्र नक्सलवाद के खत्म होने की घोषणा के बाद यहां कई बदलाव दिखाई देने लगे हैं. गांवों में सड़कें बन रही हैं, नए स्कूल और आंगनवाड़ी भवन तैयार हो रहे हैं. स्कूल खुल चुके हैं और बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंच रहे हैं. कई इलाकों में बैंक की ब्रांच भी शुरू हो गई हैं, जहां लोग बिना किसी डर के आना-जाना कर रहे हैं.

जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में अब बस सर्विस शुरू हो गई हैं. पहले नक्सली सड़कें खोद देते थे, जिससे यातायात पर असर होता था. अब लोग आसानी से बीजापुर और दंतेवाड़ा तक यात्रा कर पा रहे हैं.

ग्रामीण बोले- अब डर नहीं लगता
इसके अलावा बुर्कापाल में भी माहौल बदला है और गांवों में अब शादियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यक्रम खुलकर हो रहे हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, अब बाजार जाने या बाहर निकलने में पहले जैसा डर नहीं लगता है. हालांकि, ताड़मेटला जैसे कुछ गांवों में अभी भी सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है. फिर भी ग्रामीण मानते हैं कि पहले की तुलना में डर का माहौल काफी कम हुआ है.

सुरक्षा के लिए अब भी जगह-जगह सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हैं और निगरानी जारी है. अधिकारियों के मुताबिक, अब लक्ष्य केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है. स्थानीय परंपराओं और संस्कृति को बनाए रखते हुए क्षेत्र के विकास पर काम किया जा रहा है.

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Deepti Sharma

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