Last Updated:June 22, 2026, 15:12 IST
भारत के एक तपस्वी साधु दौलत गिरी जी महाराज पिछले 5 वर्षों से लगातार खड़े हैं. भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट भक्ति और आत्मा की शुद्धि के लिए उन्होंने 12 वर्षों तक न बैठने और न लेटने का एक बेहद कठिन और खौफनाक संकल्प लिया है.
आस्था और अध्यात्म की भूमि कहे जाने वाले भारत में अक्सर ऐसे साधु-संतों के दर्शन होते हैं, जिनकी कठिन साधना इंसानी सीमाओं को चुनौती देती नजर आती हैं. छत्तीसगढ़ के रहने वाले दौलत गिरि जी महाराज एक ऐसे ही तपस्वी संन्यासी हैं, जो पिछले पांच सालों से लगातार बिना बैठे या लेटे सिर्फ खड़े रहकर एक बेहद कठिन और दर्दनाक व्रत का पालन कर रहे हैं. उन्होंने पूरे 12 वर्षों तक न बैठने और न ही लेटने का एक अटूट संकल्प लिया है. इस खौफनाक तपस्या के पांच साल पूरे होने पर उनके पैरों में सूजन और कालापन आ गया है. लेकिन इसके बावजूद वो खड़े रहकर अपनी साधना पूरी करना चाहते हैं. दौलत गिरी मूल रूप से साधुओं के एक विशेष संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिन्हें आम भाषा में ‘खड़ेश्वरी बाबा’ के नाम से जाना जाता है. इस संप्रदाय के संत अपनी आत्मा की शुद्धि और भगवान शिव के प्रति भक्ति को दिखाने के लिए ऐसे कठिन शारीरिक कष्ट सहने का संकल्प लेते हैं.
अपने इस कड़े और जानलेवा व्रत को पूरा करने के लिए ये तपस्वी साधु रस्सियों, झूलों और विशेष रूप से तैयार किए गए हार्नेस (सहारे) का उपयोग करते हैं. जब लगातार खड़े रहने के कारण उनके पैर पूरी तरह से जवाब दे देते हैं और शरीर का वजन संभालना नामुमकिन हो जाता है, तब वे इसी झूले के सहारे अपने ऊपरी शरीर को टिकाकर खड़े रहते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही दौलत गिरि जी की तस्वीरों और वीडियो में उन्हें एक लटकते हुए झूले के सहारे विश्राम करते हुए देखा जा सकता है, जिसमें उनके पैर अत्यधिक सूजे हुए और पूरी तरह काले पड़ चुके दिखाई देते हैं. सोते समय भी लगातार खड़े रहने और शरीर में किसी भी तरह की हलचल न होने के कारण उनके पैरों में रक्त का संचार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. उनके गिरते स्वास्थ्य को देखकर कई लोगों को यह डर सता रहा है कि उनके 12 साल के लक्ष्य तक पहुंचने से बहुत पहले ही डॉक्टरों को उनके पैर काटने न पड़ जाएं.
बिलासपुर से पढ़े लिखे दौलत गिरि जी महाराज वर्तमान में एक स्थानीय मंदिर में रहकर अपना यह अत्यंत कठिन व्रत पूरा कर रहे हैं, जहां भक्तों और स्वयंसेवकों की एक पूरी टोली उनके जरूरतों का ख्याल रखती है. ये स्वयंसेवक नियमित रूप से उनके विकृत हो चुके पैरों पर विशेष औषधीय मलहम लगाते हैं, लेकिन लगातार पड़ रहे शारीरिक दबाव के कारण इस मरहम से भी उन्हें केवल मामूली राहत ही मिल पाती है. हालांकि, महाराज अपनी शारीरिक और शौच संबंधी क्रियाओं को कैसे पूरा करते हैं, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हालांकि, कुछ वीडियो क्लिपों में वे थोड़े-बहुत कदम आगे-पीछे बढ़ाते हुए भी दिखाई देते हैं, जिससे यह साफ होता है कि उन्होंने अभी तक चलने-फिरने की क्षमता को पूरी तरह नहीं खोया है और वे किसी तरह शौचालय तक पहुंचने में सक्षम हैं. मेडिकल एक्सपर्ट्स ने महाराज की इस स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है.
डॉक्टरों का कहना है कि इतने लंबे समय तक लगातार स्थिर खड़े रहने से पैरों की नसों में दबाव बढ़ जाता है. शुरुआत में इसके कारण पैरों में केवल तेज दर्द और भयंकर सूजन आती है, लेकिन समय के साथ यह स्थिति जानलेवा हो सकती है, जिससे नसों में खून के थक्के जम जाते हैं. एक मेडिकल एक्सपर्ट ने इस प्रक्रिया को समझाते हुए बताया कि जब कोई इंसान लंबे समय तक बिना हिले-डुले खड़ा रहता है, तो पैरों की नसों को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ लड़कर खून को वापस दिल तक भेजना पड़ता है. पैरों की पिंडली की मांसपेशियों में किसी भी तरह की पंपिंग क्रिया न होने के कारण खून निचले हिस्सों में ही जमा होने लगता है, जिससे त्वचा काली और बेजान हो जाती है. दौलत गिरि जी का यह हैरान कर देने वाला संकल्प भारत के एक और प्रसिद्ध तपस्वी अमर भारती की याद दिलाता है. साधु अमर भारती ने साल 1973 से लगातार अपने दाहिने हाथ को हवा में ऊपर उठा रखा है, जिसके कारण उनका वह हाथ पूरी तरह से सूखकर बेजान लकड़ी जैसा हो चुका है.
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न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, …और पढ़ें
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