‘पहले गोली मारो, फिर बांध बनाओ’ नारे से गूंजा बस्तर, बोधघाट प्रोजेक्ट को लेकर बढ़ा तनाव

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Last Updated:June 23, 2026, 09:10 IST

Raipur News: बस्तर में बोधघाट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की तैयारी का आदिवासी विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि बांध बनने से गांव, जमीन और जंगल डूब जाएंगे, जिससे हजारों परिवारों पर असर पड़ेगा. ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.

Bodhghat Hydroelectric Project: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दस साल पुराने बोधघाट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की तैयारी के बीच वहां के आदिवासियों का विरोध तेज हो गया है. प्रभावित गांवों के लोगों ने साफ शब्दों में कहा है कि उनकी जमीन, जंगल और घरों को उजाड़कर किसी भी कीमत पर बांध नहीं बनाया जा सकता है. विरोध प्रदर्शन के दौरान कई ग्रामीणों ने नारे लगाए और फिर कहा कि पहले हमें गोली मारो, फिर बांध बनाओ. बोधघाट परियोजना का प्रस्ताव कई साल पहले रखा गया था. इस प्रोजेक्ट के तहत बड़ी संख्या में गांवों के डूब क्षेत्र में आने की आशंका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह बांध बनता है तो हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़ेंगे. इसके अलावा खेती की जमीन, जंगल और पारंपरिक आजीविका के साधन भी असर होगा.

ग्रामीणों ने लगाया आरोप
आदिवासी समुदाय के मुताबिक, उनके लिए जंगल और जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी पहचान और संस्कृति का हिस्सा हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना को लेकर उनसे उचित चर्चा नहीं की गई और उनकी सहमति के बिना आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है. विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मांग की कि सरकार पहले परियोजना से होने वाले प्रभावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करें. इसके साथ ही ग्राम सभाओं की राय को प्राथमिकता दी जाए. ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर उनके अधिकारों और जीवन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

बोधघाट परियोजना से लाभ
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि बोधघाट परियोजना से क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ेगा और विकास को गति मिलेगी. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास तभी सार्थक होगा, जब उससे प्रभावित होने वाले लोगों की सहमति और हितों का पूरा ध्यान रखा जाए. फिलहाल, परियोजना को लेकर बस्तर में माहौल गर्म है. आदिवासी संगठन और ग्रामीण लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि अपनी जमीन और जंगल बचाने के लिए वे हर लेवल पर संघर्ष जारी रखेंगे.

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Deepti Sharma

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